इन दिनों आईडिया का एक विज्ञापन टीवी चैनेल्स पर छाया हुआ है। विज्ञापन में एक लड़की होती है जिसे बस स्टैंड पर एक युवक छेड़ रहा होता है। वो अपने मोबाइल फ़ोन से सबसे सुझाव मांगती है... दो ऑप्शन्स होते हैं ... गाँधी या कमांडो ? जनता का मेस्सज आता है, जिनमे निन्यानवें प्रतिशत लोगों का मत होता है कमांडो सिर्फ़ एक प्रतिशत का ही वोट गाँधी को जाता है। उसके बाद लड़की एक किक्क मारती है और इव टीसर चारों खाने चित्त।
विज्ञापन देखकर एक सवाल मेरे मन में उठा की क्या इस तरह से महात्मा गांधी की तुलना करना और फ़िर उन्हें हारते हुए दिखाना उचित है? मैं यही सवाल आप सभी से करती हूँ ... क्या ये उचित है?
जिसने भी इस विज्ञापन की स्क्रिप्टिंग की हो अगर वो अपनी स्क्रिप्ट में थोड़ा सा फेर बदल कर लिया होता और गाँधी की जगह गांधीगिरी कर देता तो शायद उसका अर्थ थोड़ा अलग हो जाता...या फ़िर ये हो सकता है की मैं इसे लेकर कुछ ज़्यादा सोंच गई, पर ये सच है की हाँ मुझे ये अच्छा नहीं लगा।
बहुत दिनों से कुछ लिख नही पाई । कारण बहुत से है ... पर सबसे आसान जवाब है समय की कमी। व्यस्तता थोडी बढ़ गई थी । ऑफिस में काम से फुर्सत नही मिलता था ... घर पर थकावट कुछ लिखने नही देती थी। आज सारे काम निपट चुके हैं , कार्यक्रम का आउट चल रहा है। सोचा लगे हाथ क्यों ना कुछ लिख डालु। शनिवार की शाम यानी अभी ऑफिस के ज्यादातर लोग जा चुके है सिर्फ़ जिनका काम है या फ़िर लाइव वाले लोग रुके हुए हैं । मैं अपने काम से परेशान हूँ एपिसोड अभी तक आउट नही हो सका है । दो बार आउट लगा चुकी , कुछ ना कुछ प्रॉब्लम हो रहा है। इन्ही सब उलझनों में फंसी मैं... जाने कब अपनी सोच में उलझ गई पता ही नही चला। छोटी ... मेरी सबसे अच्छी दोस्त ... जो कभी मेरे सबसे करीब थी । मेरी बहुत सी बातें जो सिर्फ़ वो जानती थी और उसकी बहुत सी बातें शायद सिर्फ़ मैं जानती थी। आज मुझसे कितनी दूर ... या शायद आज हमदोनो अजनबी बन चुके हैं। उसने ग्रीटिंग्स में लिखा था की जब मैं समय को पकड़ लूंगी तब हमदोनो साथ होंगे। आज न जाने कितने साल गुज़र चुके हैं ... हमदोनों की मुलाक़ात नहीं हुई। घर पर रहने के बावजूद ना वो मुझसे मिलने आई ना मुझे कुछ ख़ास इक्...
Comments
'धन पिशाचों' का एक ही लक्ष्य है - पैसा। सो, गांधी उनके लिए 'विचार' नहीं, 'सेलेबल आईटम' है।
आप बिलकुल ठीक कह रही हैं।
Aapka sujhav achchha hai. par nishchint rahiye is vigyapan se Gandhi ji par koi fark nahiN padne wala. jab hatyaare ki goli unka kuchh nahin bigaag saki to in tuchhe-muchhe vigyapanoN se kya hona hai.!
मीत