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Showing posts from April 13, 2008

छोटे शहर की याद

छोटे शहर की याद बहुत आती है वो सुबह सुबह पूजा की घंटियों की आवाजें फिर फेरीवाले और दूधवाले की पुकार शाम में समोसे और चाय का साथ । जी करता है कुछ वक्त निकाल कर बड़े शहर की भागदौड़ से बहुत दूर चली जाऊ वापस उस छोटे शहर की गोद में फिर से वही खुलापन , वही सरलता छोटी छोटी बातों पर खुश हो जाना छोटी बात पर उदास हो जाना पड़ोस के सुख दुःख में साथ निभाना पर अफ़सोस अब बहुत ही मुश्किल है वापस जा पाना।

परिवर्तन

धीरे धीरे चलते चलते दूर कहीं हम आ पहुंचे है चाहे भी तो ना रूक पाए वक्त की धार से जूझ रहे हैं ।