सभी भाग रहे हैं कोई मेट्रो के लिए भाग रहा है, कोई मेट्रो में सीट पाने के लिए भाग रहा है... कोई मेट्रो बदलने के लिए भाग रहा है... सभी भाग रहे हैं. कोई बस के लिए, तो कोई ऑटो के लिए तो कोई रिक्शा के लिए, भाग सभी रहे है. हर तरफ भागम भाग ... ऐसा लगता है की सबके अन्दर एक डर है की कही उन्होंने भागना बंद किया तो वे पिछड़ जायेंगे. मै भी उन में से ही एक हूँ... मै भी भाग रही हूँ... ये बात और है की मै रूकना चाहती हूँ... थम जाना चाहती हूँ , लेकिन ये भी एक कटु सच है की अब रूकना संभव नहीं, बस भागते जाना है. अब तो बस इस भागम भाग में ही खुशी ढूँढनी है
बहुत दिनों से कुछ लिख नही पाई । कारण बहुत से है ... पर सबसे आसान जवाब है समय की कमी। व्यस्तता थोडी बढ़ गई थी । ऑफिस में काम से फुर्सत नही मिलता था ... घर पर थकावट कुछ लिखने नही देती थी। आज सारे काम निपट चुके हैं , कार्यक्रम का आउट चल रहा है। सोचा लगे हाथ क्यों ना कुछ लिख डालु। शनिवार की शाम यानी अभी ऑफिस के ज्यादातर लोग जा चुके है सिर्फ़ जिनका काम है या फ़िर लाइव वाले लोग रुके हुए हैं । मैं अपने काम से परेशान हूँ एपिसोड अभी तक आउट नही हो सका है । दो बार आउट लगा चुकी , कुछ ना कुछ प्रॉब्लम हो रहा है। इन्ही सब उलझनों में फंसी मैं... जाने कब अपनी सोच में उलझ गई पता ही नही चला। छोटी ... मेरी सबसे अच्छी दोस्त ... जो कभी मेरे सबसे करीब थी । मेरी बहुत सी बातें जो सिर्फ़ वो जानती थी और उसकी बहुत सी बातें शायद सिर्फ़ मैं जानती थी। आज मुझसे कितनी दूर ... या शायद आज हमदोनो अजनबी बन चुके हैं। उसने ग्रीटिंग्स में लिखा था की जब मैं समय को पकड़ लूंगी तब हमदोनो साथ होंगे। आज न जाने कितने साल गुज़र चुके हैं ... हमदोनों की मुलाक़ात नहीं हुई। घर पर रहने के बावजूद ना वो मुझसे मिलने आई ना मुझे कुछ ख़ास इक्...
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