हर रोज़ ऑफिस आते - जाते समय जंतर मंतर से होकर गुजरना पड़ता है, और हर रोज़ मेरी नज़र 1984 भोपाल गैस कांड के भुक्तभोगियों को न्याय दिलाने के लिए धरना पर बैठे उन लोगो पर पड़ती है जो तेज़ धूप हो या फ़िर आंधी-तूफ़ान अपनी जगह पर डट कर बैठे हुए हैं और ये तय कर लिया हैं की वे तब तक लड़ते रहेंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। आश्चर्य होता है ये देख कर की इनलोगों की खबरें ना तो अखबारों में पढ़ने को मिलती हैं और ना हीं किसी न्यूज़ चैनल पर देखने को मिलती हैं । ऐसा भी नहीं कह सकते की उनकी मांग नाजायज़ है । धरने पर बैठे ज्यादातर लोग आज भी तब की लापरवाही की सज़ा भुगत रहे हैं। कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब अब तक नहीं मिल सका है। बीस साल पहले भोपाल में यूनियन कार्बाइड और डॉ केमिकेल्स की फैक्ट्री से निकले सफ़ेद धुएँ ने लाखों लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी । मेथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव का प्रभाव आज भी वहाँ देखने को मिलता है। आज भी वहाँ के पानी में ज़हर घुला हुआ है। उस समय जो भी बच्चे पैदा हुए आज वो बीस साल के हो चुके होंगे । आख़िर उनकी क्या गलती रही होगी जो आज वो किसी ना किसी अपंगता का शिकार हैं। क्या कुछ पैसे देकर, कुछ मुआवजा देकर हम उनकी कमियों को पुरा कर सकते हैं शायद नहीं।
बहुत दिनों से कुछ लिख नही पाई । कारण बहुत से है ... पर सबसे आसान जवाब है समय की कमी। व्यस्तता थोडी बढ़ गई थी । ऑफिस में काम से फुर्सत नही मिलता था ... घर पर थकावट कुछ लिखने नही देती थी। आज सारे काम निपट चुके हैं , कार्यक्रम का आउट चल रहा है। सोचा लगे हाथ क्यों ना कुछ लिख डालु। शनिवार की शाम यानी अभी ऑफिस के ज्यादातर लोग जा चुके है सिर्फ़ जिनका काम है या फ़िर लाइव वाले लोग रुके हुए हैं । मैं अपने काम से परेशान हूँ एपिसोड अभी तक आउट नही हो सका है । दो बार आउट लगा चुकी , कुछ ना कुछ प्रॉब्लम हो रहा है। इन्ही सब उलझनों में फंसी मैं... जाने कब अपनी सोच में उलझ गई पता ही नही चला। छोटी ... मेरी सबसे अच्छी दोस्त ... जो कभी मेरे सबसे करीब थी । मेरी बहुत सी बातें जो सिर्फ़ वो जानती थी और उसकी बहुत सी बातें शायद सिर्फ़ मैं जानती थी। आज मुझसे कितनी दूर ... या शायद आज हमदोनो अजनबी बन चुके हैं। उसने ग्रीटिंग्स में लिखा था की जब मैं समय को पकड़ लूंगी तब हमदोनो साथ होंगे। आज न जाने कितने साल गुज़र चुके हैं ... हमदोनों की मुलाक़ात नहीं हुई। घर पर रहने के बावजूद ना वो मुझसे मिलने आई ना मुझे कुछ ख़ास इक्...
Comments
शायद ब्लागवाणी पर आपका यह पहली पोस्ट दिखायी दी है.
कमसे कम आपने तो आवाज उठायी!