आईना

चाहे सोने के फ्रेम में जड़ दो, आईना झूठ बोलता ही नहीं ---- ‘नूर’

Wednesday, June 8, 2016

एक ज़िंदगी में अनेक ज़िंदगियाँ





                                       








रात 
जब अंतिम सफर पूर्ण करती है
नई ज़िन्दगी
मुस्कुराती मिलती है ,
नये दिन के साथ 
एक नयी ज़िन्दगी।
एक ज़िन्दगी में
कितनी 'ज़िंदगियाँ '
'जी ' लेते हैं हम ?



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