Saturday, November 29, 2008

मुंबई मेरी जान





चमचमाती रोशनी से नहाई
मुंबई की रात
और नगर की पहचान
भव्य ताज
कई ऐतिहासिक घटनाओं की गवाह

लेकिन,
बुधवार की काली रात
देखते ही देखते
छा गया तबाही का मंज़र
मुठी भर दहशतगर्दों के हाथों में थी
सैकडों लोगों की जान

ग्रेनेड के धमाकों
और गोलियों की आवाजों ने
ोडी रात की चुप्पी
देखते ही देखते आग और धुएँ में नहाई थी
मुंबई की भव्यता
देश की आर्थिक राजधानी
डूब गई अंधेरे में.

2 comments:

v said...

good work. such things keep motivating people working for nations. it s really nice to read such article which shake one's soul to rise against terror acts.

Bandmru said...

aachchha laga! likhte rahen.

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