आज़ादी


















फ़स में कैद कर दो सांस
चाहे, जुबां पर ताले जड़ दो
सारे पंख नोच डालो, या
पैरों में बेड़ियां मढ़ दो
हीर सी मौत दे दो या
ज़िंदा ही दफन कर दो
रूह आज़ाद है मेरी जां
इश्क़ के गीत गाएगी 
इश्क़ की लय में थिरकेगी
फूल सी खिलखिलाएगी ।


© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

Comments

thusuk said…
बहुत सुंदर।वाह

Popular posts from this blog

मनुष्य एक सामाजिक नहीं सामूहिक प्राणी है!

महिला दिवस और एक सशक्त महिला

‘आई ऍम फैन युसु’