Wednesday, November 26, 2014

आँखें (चंद हाइकु )











बेरंग जहां
रोशन कर गया
आँखों का दान
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जागती आँखें
चाँद पाने की ज़िद
उंघते ख्वाब
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छलके शब्द
नैन करे संवाद
एक लौ दिखी
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चार थे नैना
चश्मा घर में छूटा
सब धुंधला
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राज़ खोल दी
दिल में दफ़न था
आँखें बोल दी
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सीमा से परे
उड़ने को तत्पर
नैन परिंदे
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जूझते रहे
आँखों ने सिखाया था
शूल हैं फूल


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