Tuesday, April 22, 2014

फ़ासले (त्रिवेणी )












एक दूरी  सी बन जाए दरम्यान तो अच्छा है
पलकों पे सिमट जाए हर ख्वाब तो अच्छा है.

हर बार फ़ासले बांझ नही हुआ करते.



© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

No comments:

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...