Thursday, January 17, 2008

नवयुगल

घन छाया नभ में अभी अभी
बादल गरजे है बार बार।
अब गरज गरज बरसे है घन
धरती भींगी है झूम झूम

तरुणी भाई है ये धरती
वरुण भी हुआ है तरुण अभी ।
हवा के झोंके धरती को
चूम चूम करते हैं प्यार
तब झूम झूम नाचे है
मन का मयूर बार बार।
नवयुवती सी ये धरा
रहे खिली खिली

जब पड़े फुहार।
सब कहे इस नवयुगल को
बस प्यार प्यार, बस प्यार प्यार।

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

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