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संतुलन (हाइगा)

जीवन मर्म संतुलित कदम सिखाते नट © 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

यादें

तुम्हारी तरफ से आती हुई पुरवैया के लिए खोल दिया मैंने अपने घर के सभी दरवाज़े -झरोखे इस चाहत में कि उस गुलाबी हवा की थोड़ी सी रंगत स्वयं में समाहित कर सकूँ हवा में तैरती नमी को भी महसूस कर सकी मैं देर तक जाने कब वो नमी बूँद बनकर छलक आई गालों पर…   © 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित! 

बूँद (चोका )

बारिश में भीगते हुए उपजा एक  ख्याल ----- प्रेम बरसा जन्मी - नन्ही सी बूँद नवसृजन प्रेम में भीगी बूँद बदला रूप पिघलती रही थी कतरे में ’वो’ बूँद। © 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

कल्पना

लाल बुरांश बिखरी है कल्पना सूर्ख अल्पना © 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

पहाड़ों पर रात (हाइगा)

ऊंघते चीड़ पहाड़ों पर रात चांदनी साथ © 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

परिंदे (तांका )

तिनका जोड़ा चिड़ियों ने बनाया   छोटा घोंसला घोंसले में अंडे थे चिड़ियां उन्हें सेती चूजे निकले   चिड़ियां खाना लाई   चोंच में डाला   फुर्र-से उड़ गई   चहचहाते चूजे   हमारा घर क्रीड़ास्थल बना था चूजे उड़ते गिरते - संभलते चिड़ियाँ सिखाती थी चंद दिनों में चूजे उड़ना सीखे घोंसला-घर वीरान हो चुका था परिंदे उड़ चले  । © 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

संसद (हाइगा )

छज्जे पे बैठी कौओं की संसद है चर्चा क्या होगी  ! © 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!