आईना

चाहे सोने के फ्रेम में जड़ दो, आईना झूठ बोलता ही नहीं ---- ‘नूर’

Tuesday, August 6, 2013

'आत्मविश्वास' (लघु कथा)


रात के डेढ़ बज रहे है, यामिनी बार बार अपने हाथों को धोये जा रही है. इसी हाथ को उसके गन्दे हांथो ने पकड़ा था. उस मंझोले कद वाले पिशाच पर थप्पड़ का भी कोई असर नही था. लोगों कि आवाज़ सुनते ही अन्धेरे में कहीं गायब हो गया वो. अगर लोग नही आए होते तो...? यामिनी अपने हाथों को बार बार धोकर उस एहसास... उस डर को धोना चाह रही है, जो कहीं ना कहीं उसके आत्मविश्वास को कम कर रहा है .



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