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वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर...

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राह कंटीली और पथरीली, हौस’ला टूट रहा है,
जिस्म-रूह-अहसास-बंधन,सबकुछ छूट रहा है। सुर्ख सपने और फूल सुनहरे, ये तो बीती बातें हैं, कथा-कहानी, खेल पुराने, खो गई ये सौगातें हैं। मौत लगे है अब रूमानी, आँखों से न गिरता पानी। दुःख-चिंता से टूटा नाता, राग-रंग अब कुछ न भाता । यादों का प्यारा आँगन अब पीछे छूट रहा है, राह कंटीली और पथरीली, हौस’ला टूट रहा है।



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