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Showing posts from December 2, 2018

टुकड़े में ज़िन्दगी ( कहानी)

https://epaper.prabhatkhabar.com/1918875/Surbhi/Surbhi#page/6/1 ( एक और कहानी प्रकाशित ) 

मूल कहानी पढ़ें --


“नींद भी तो मौत ही है और सपने, मन की गहराई में बैठे अहसास। ऐसी चाहत जो छद्म रूप में सपनों में पूरी होती है। मिस शर्मा अक्सर सपनों में भटकती है, जैसे किसी की तलाश हो ।” वे जहां रहती हैं उसका नाम ‘नवांकुर’ है। ‘नवांकुर’ नाम है पर असल में लोगों के जीवन की सांध्य बेला का ठिकाना है ये आश्रम। यहाँ जाड़े की सुबह बेहद सुस्त होती है। जब तक मारिया चाय के लिए आवाज़ ना लगाए, सब अपनी-अपनी रजाईयों में दुबके होते हैं। इस वृद्धाश्रम में आमतौर पर दो ही तरह के लोग होते हैं एक वो जिन्हें अपना कहने के लिए कोई नहीं, दूसरे वो जिनके अपनो ने हीं उन्हें पराया कर दिया।  मिस शर्मा पहले केटेगरी में आती थी। वृद्धाश्रम में रहने का निर्णय उन्होंने स्वयं लिया था। अपने घर को किराए पर देकर तीन सालों से वे यहां रह रही थी। क्षमता के अनुसार यहां कमरे उपलब्ध थे। पैसे वालों के लिए व्यक्तिगत कमरा था और जिनके पास ज़्यादा पैसे नहीं थे उनके लिए डॉरमेट्री में रहने की व्यवस्था थी। डॉरमेट्री में रहने वाले ज़्यादातर लोग अपनो के …