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Showing posts from January 21, 2018

'जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय'

26 जनवरी के साथ ही कई सारी यादें भी ताज़ा हो जाती हैं।  बचपन के उत्साह की, विद्यालय की, जलेबी की, दोस्तों की, खूब सारी मस्ती की। बचपन से ही बच्चों को देशभक्ति और राष्ट्र से प्रेम करना सिखाया जाता है।  अच्छी बात है लेकिन अच्छा इंसान बनना, एक-दूसरे का आदर करना, अपनी धरोहरों को सम्मान और संरक्षण देना ऐसी बातें भी सिखाई जानी ज़रूरी है। 

पिछले हफ्ते सप्ताहांत पर भरतपुर के केवलादेव पक्षी उद्यान  में जाना हुआ। वहाँ देश के अलावा विदेशों से भी पर्यटक आए हुए थे, जो किराए पर साइकिल लेकर उद्यान का आनंद ले रहे थे। मैंने और मेरी मित्र ने भी साइकिल किराए पर लेकर अपनी यात्रा शुरू कर दी।


झील के किनारे बैठकर पक्षियों के कलरव का आनंद ले रही थी तभी कुछ लड़कों  की अश्लील टिप्पणी सुनी जो एक विदेशी महिला पर की गई थी।  वो महिला अकेली थी और साइकिल और बड़े लेंस वाले कैमरे के साथ वहाँ आनंद लेने आयी थी।  मैंने अपनी मित्र से कहा भी कि वे लोग उससे  बदतमीज़ी कर रहे हैं  पर फिर हमने इस पर  प्रतिक्रया  नहीं दी, कि  यूँ हीं किसी के मामले में टांग क्यों अड़ाना।  उद्यान घूमने के बाद वापिस लौटते हुए  मैंने उस महिला को  उनपर च…

सिर्फ विरोध के लिए विरोध या कुछ और ?

बचपन में चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मावती और उसके जौहर की कथा खूब सुनी थी। किसी बाल पुस्तक में भी राजा रतन सिंह की बहादुरी के किस्से और पद्मावती के जौहर की कथा पढ़ी थी। लोककथाओं में आज भी उनके किस्से ज़िंदा हैं। फिर उन किस्सों को फिल्म के माध्यम से दिखाए जाने पर इतना बवाल क्यों ? हमें किस पर आपत्ति होनी चाहिए ? क्या आज हम फंतासी और सत्य के बीच काफर्क भूलते जा रहे हैं या फिर हम सब किसी भ्रम अथवा किसी पूर्वाग्रह में जी रहे हैं।     संजय लीला भंसाली ने पद्मावती में भी अपने पुराने अंदाज़ को बरक़रार रखा है।उन्हें अगर ‘शो मैन’ कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। उनकी फिल्मों का एक स्टाइल है। उनकी फिल्मों में एक भव्यता दिखाई देती है जो आप सिनेमा हॉल में हीं महसूस कर सकते हैं। संगीत में परिवेश-माहौल का पूरा असर दिखाई पड़ता है। इस फिल्म में भी उन्होंने लोकधुन और लोकगीतों का इस्तेमाल किया है। एक तरफ राजस्थान के लोकगीत तो दूसरी ओर शेरो  शायरी और अरबिक वाद्यंत्रों का प्रयोग। मैंने जायसी के पद्मावत को नहीं पढ़ा है लेकिन इस फिल्म को देखकर उसकी कमी नहीं खली। अलाउद्दीन खिलजी की बर्बरता, पद्मावती का सौंदर्य, रा…