Monday, August 7, 2017

अनंत की ओर...














मेरे विचारों की कोमलता पर
अक्सर हावी हो जाते हैं
तुम्हारे अनगढ़ विचार
तुम्हारी संगत में मन सूफी सा हो गया
और तुम रहे औघड़ के औघड़
कहाँ सोच पाती कुछ अलग से तुम्हारे लिए

अक्सर सैकड़ों तितलियाँ
मेरे इर्द गिर्द पंख फैलाए बे-परवाह उड़ती हैं
इन्हें छोड़ जाते हो अक्सर मेरे आस पास रंग भरने को
दूर मुस्कुराते फूलों की सुगंध पहुँच हीं आती है मुझ तक,
तय है इसमें भी हाथ तुम्हारा ही है,
ये तुम ही तो हो जो ले आते हो इन्हें मेरे करीब।
ज़िन्दगी के साथ दौड़ लगा रही हूँ,
जानती हूँ एक दिन तुम आओगे
फिर ये रफ़्तार थम जाएगी हमेशा के लिए
लिबास, चेहरा और किरदार -सब बदल जाएंगे
जन्म लेगी एक नई कहानी-
या फिर शायद ये कहानी आखिरी हो !

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

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