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Showing posts from April 17, 2016

मेरा संसार

तू पारस, और, मैं हूँ पत्थर
मैं एक शिला, तू शिल्पकार 
तू रवि, मैं तुझसे रौशन
मैं झरना, तू सागर विशाल
भटकूँ मैं तीनो लोक, फिर भी 
तुझ में ही निहित, मेरा संसार

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