Thursday, April 28, 2016

इंतज़ार

















इससे पहले कि-
सभी यादें धुंधली पड़ने लगे
इंतज़ार की रातें नियति बन जाए
ज़िन्दगी की राहें ख़त्म होने को आए-
सिर्फ एक बार
चले आना
उस घरौंदे में,
जहां जी थी हमने 

थोड़ी सी ज़िन्दगी
देखे थे गुलाबी ख्वाब
सेंकी थी अपने हिस्से की धूप
चंद पल के लिए ही सही -


© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

No comments:

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...