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Showing posts from December 13, 2015

उदास चाँद

आज चाँद
बहुत उदास था,
हर ओर पसरी थी ,
गहरी-डरावनी 
अंतहीन रात -
सितारों की किरचें
चुभती रहीं थीं,
होश खोने तक-
रूह के ज़ख्म, 
कहाँ नज़र आते हैं,
बस दे जाते हैं
अंतहीन दर्द
या, बन जाते हैं नासूर। 

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