Monday, July 13, 2015

एक ख्याल .... बस यूँ हीं












ये रात अक्सर मुझ-सी लगती है,
और बादल कुछ- कुछ, तुम-सा !
हँसता बादल, उदास रात,
आज मिले हैं, बरसों बाद।

(एक रात बादलों को भटकता देख उपजा एक ख्याल )

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

3 comments:

Adarsh Kumar said...

ख्याल अच्छा है

Adarsh Kumar said...

सच कहता हूँ ये सवाल अच्छा हैं
मेरा यकीन करो ख्याल अच्छा है

Priyambara Buxi said...

शुक्रिया ...

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

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