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Showing posts from 2015

उदास चाँद

आज चाँद
बहुत उदास था,
हर ओर पसरी थी ,
गहरी-डरावनी 
अंतहीन रात -
सितारों की किरचें
चुभती रहीं थीं,
होश खोने तक-
रूह के ज़ख्म, 
कहाँ नज़र आते हैं,
बस दे जाते हैं
अंतहीन दर्द
या, बन जाते हैं नासूर। 

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

यादें क्या हैं ?

यादें क्या हैं ?
एक आदत जो
प्राथमिकताओं के अनुसार
सिमट जाती हैं
किसी दिवार के
कोने में
दफ़्न हो जाती हैं
डायरी के पन्नों में कहीं
या फिर
कैद हो जाती है
किसी मेज की दराज में
गुज़रते वक़्त के साथ ही
चढ़ जाती हैं
उस पर समय की परतें
और जब ये परतें उतरती हैं
तो यादें
बन जाती है सैंकड़ों चीटियाँ
जो रक्त के साथ
धमनियों से होती हुई
पहुँच जाती है मस्तिष्क में
और उन्हें तब तक नोचती हैं
जब तक असहनीय दर्द
हर सोच को शिथिल ना कर दे
यादें बन जाती हैं
ह्रदय की सुषुप्त ज्वालामुखी
जो सुलगता रहता है और
एक दिन फूट पड़ता है
लावा बन आँखों से
यादें ही तो हैं!

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

आज़ादी

कफ़स में कैद कर दो सांस चाहे, जुबां पर ताले जड़ दो
सारे पंख नोच डालो, या पैरों में बेड़ियां मढ़ दो हीर सी मौत दे दो या ज़िंदा ही दफन कर दो रूह आज़ाद है मेरी जां इश्क़ के गीत गाएगी इश्क़ की लय में थिरकेगी फूल सी खिलखिलाएगी ।

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

मृगमरीचिका

कोमलनामथाउसका...दिखनेमेंभी बेहद कोमलथी, हालांकिनैननक्शसाधारणथेलेकिनचेहरेपरपानीथा…एकअलगसाआकर्षण।बेहदसंवेदनशीलऔरकोमलमनथा - कोमलका।घरकीसबसेबड़ीऔरदुलारीबेटी।उम्रकरीबसोलहसाल, लेकिनजिम्मेदारियाँघर