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Showing posts from September 14, 2014

मुक्तक १

कल के हमकदम आज किधर गए ज़र्द पत्ते थे, पतझर में बिखर गए परछाइयों से जुदा होना आसां न था तेज़ हवा थी अहबाब भी मुकर गए
-------------प्रियम्बरा

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तूफ़ान ( त्रिवेणी )

रक्तिमआस्मांऔरफिजांखामोश तूफ़ानकीतेज़ीसेसहमाहैचमन
बादलोंनेखेलीहैखूनकीहोली।
..............प्रियम्बरा
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