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शामें-हिज़्र (त्रिवेणी )

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उदास शामें, यादों के आबशार, बेकल आँखें हर आहट पर तेरे आने की मुन्तज़िर मेरी आँखें

शामें-हिज़्र ऐसी नाशाद होंगी सोचा न था।


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