Thursday, June 26, 2014

शामें-हिज़्र (त्रिवेणी )








उदास शामें, यादों के आबशार, बेकल आँखें
हर आहट पर तेरे आने की मुन्तज़िर मेरी आँखें


शामें-हिज़्र ऐसी नाशाद होंगी सोचा न था।



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अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...