‘उदास शाम’ (गीतिका )

















उदास शामें और ये तन्हाई,
प्यार किया तो ये सज़ा पाई।
खोखली रवायतों से लड़ना,
बदले में मिली सिर्फ रुसवाई।
उनका आना फिर चले जाना ,
इश्क में दिल ने फिर चोट खाई।
इक आशियाँ सजा लिया मिलकर,
तोड़ गया वो सनम हरजाई।
झरते रहे आँखों से आंसू,
बिन मौसम ये बरसात आयी।










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