Monday, September 29, 2014

हर्फ़ जो दफ़न हो गए थे डायरी के पन्नों में_२६१२१९९३
















ज़िंदगी में जाने कितने रंग समाहित है ज़रूरत है उन रंगों को संवारने की, सजाने की। पूरा जहां रंगों से सजा हुआ है, आकाश, पेड़ - पौधे, नदियां, फूल, तितलियाँसुखद लगता है प्रकृति में बिखरे इन रंगों को देखना, उनसे खेलना। ऐसा महसूस होता है कि दिल की सारी बातें पेंटिंग के ज़रिये अभिव्यक्त की जा सकती है    जब प्रकृति की खूबसूरती को देखती हूँ तो इच्छा होती है कि बस उन्हें कैनवास में कैद कर लूँ, पर अफ़सोस की मेरे पास चित्रकारी का हुनर ही नहीं है।  वैसे देखा जाए तो ये धरती एक कैनवस ही तो है..... जिसपर प्रकृति की तस्वीर बड़े ही प्यार से उकेरी गयी है।  हर रंग की अपनी अहमियत।  आजकल मेरी कल्पनायें बेलगाम होती जा रही हैं।  

आँखों में सतरंगी सपने
युवा दिल जोशीला
समुद्र सा उफनता हुआ
ज़िंदगी कितनी खूबसूरत है
मोनालिसा की तरह।   


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