Wednesday, August 27, 2014

चंद हाइकु


















पिता 1 . पिता का साया मजबूत दीवार यादें शेष है 2 . कंटीले पथ आँखों ने सिखाया था हारना नहीं ३. बादल छंटे उड़ चला परिंदा असीम शान्ति सावन १. बैरन बूँदें छीने रे मोरा चैन आ जाओ कान्हा २. बरसे मेघा तरसे तन - मन सूना सावन राखी राखी सजी है भाई की राह देखे व्याकुल नैना कृष्णा 1. मुरली धुन सुन- बेसुध राधा यमुना तीरे 2. रण में कान्हा राग-रंग से दूर बंसी उदास इरोम शर्मिला को समर्पित ज़र्द चेहरा हौसला है बुलंद मुक्त ‘इरोम’





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अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...