Wednesday, May 28, 2014

जो यह पता होता....










काश,
शबनम  में  भीगी
उस मीठी रात को
चंद पलों के  लिए
रोक लेती,
क़ैद कर लेती मुठ्ठियों में,
पलकों में छिपा लेती-
जो यह पता होता
कि सुबह की लालिमा
तुम्हे मुझसे
जुदा  कर जाएगी
ना कुछ पल के लिए
ना एक ज़िंदगी के लिए
शायद,
युगों - युगों के लिए .





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