Monday, April 28, 2014

फितरत (त्रिवेणी )







यूँ तो चमकता माहताब था हमसफ़र उसका,
फिर क्यों सिमट आयी आफताब की बाहों में रात

मुद्दतें बीत गयी इश्क़ ज़हीन ना हुआ।




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अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...