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अनुभव




कुछ लोग बड़े अजीब होते है .....कल शाम फेसबुक में एक सज्जन का संदेश आया, सज्जन ने लिखा था कि वे मेरे ओफिस आए थे और यहाँ मेरे बारे में सबसे पूछे लेकिन किसी ने उन्हें कुछ बताया ही नही. जिन लोगों का नाम उन्होंने बताया उस से मुझे समझ में आ गया कि वे सज्जन वास्तव में राज्य सभा टीवी में मेरे बारे में वेरिफिकेशन कर के आए है... मन तो हुआ जवाब में लिख दे कि हामिद अंसारी जी से पुछ्ना था ना... कहाँ आप राजेश बादल में अटके है. बहुत अफसोस होता है ऐसे लोगो से मिल कर जिन्हें जान ना पह्चान लेकिन दुसरो के बारे में जानने कि बड़ी इच्छा होती है. मैंने बड़े ही सभ्य तरीके से अपने बारे में बताया और साथ ही ये भी कहा कि मैंने तो आपको पहचाना नही. फिर उनका कोई जवाब नही आया.

मुझे समझ नही आ रहा था कि ऐसे मेसेज भेजने के पीछे उनकी मंशा क्या रही होगी. मेरी उनसे किसी तरह कि जान पह्चान नही है, ना मैंने कभी उनके साथ काम किया है, ना ही वो फेसबुक पर ही मेरे मित्र है.  अगर वे सच में मुझसे मिलना चाह्ते थे तो उन्हें पहले मुझे मेसेज कर के पुछ तो लेना चाहिए था, जब फेसबुक पर मेरे पास मेसेज भेज सकते थे तो ये भी देख लेते कि हम आख़िर कहा काम करते हैं. अफसोस होता है ऐसे लोगों से मिलकर जिन्हें ख़ुद से ज़्यादा दुसरो की ज़िंदगी में रूचि होती है. वैसे हम आते भी तो ऐसे राज्य से है जहाँ ज़्यादातर लोगो को दुसरो कि ज़िंदगी में दखल देने की आदत विरासत में ही मिल जाती है. कौन क्या है, कहा काम करता है, कैसे रह्ता है, किस से - किस से दोस्ती है, क्या खाता है, क्या पहनता है - सब पर उनकी नजर होती है. भगवान बचाये ऐसे लोगो से .        


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