Tuesday, March 18, 2014

बंधन ..












कई रिश्तों में
बाँधने की कोशिश की थी
मैंने - तुम्हे.
भूल गयी थी,
हर रिश्ते का सिरा
जुड़ा है उस मंज़िल से
जिसकी बुनियाद ही
कमज़ोर पडी है.
यूँ लगता है जैसे
गुज़रते ज़ीस्त के साथ
ये रिश्ता भी ना
गुज़र जाए कहीं ...




© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

No comments:

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...