आईना

चाहे सोने के फ्रेम में जड़ दो, आईना झूठ बोलता ही नहीं ---- ‘नूर’

Tuesday, June 11, 2013

आख़िर जिया ने ऐसा क्यों किया ?





जिया खान नही रही. वैसे एक अदाकारा के तौर पर वे मुझे कुछ ख़ास पसंद नही थी, किन्तु जिस तरीके से उन्होंने अपनी ज़िंदगी खत्म कर ली, एक महिला के तौर पर ना चाहते हुए भी मैं उस से जुड़ती चली गयी. एक समय तो ऐसा लगा कि कुछ देर और उसकी कहानी टी वी पर देखी तो भावनात्मक रुप से कमजोर हो जाऊँगी.
एक 25 साल कि प्यार में पागल युवती, जिसने अपने प्यार को साबित करने के लिए अंततः खुदकुशी का सहारा लिया . प्यार में पागल होने का पता भी उसके पत्र से चलता है, जिसपर उसके हस्ताक्षर भी नही है... जिसमें बहुत ही निजी बातें भी लिखी गयी है, जिसे चैनल वाले बार बार दिखा रहे है. जिन बातों को उसने  अब तक सबसे छिपाया होगा वो सार्वजनिक हो चुका है.

ज कि पीढ़ी "मूव ऑन" वाली है... जब तक प्यार है तब तक रिश्ता है नही तो रास्ते अलग. किसी के लिए जान देने जैसी घटनाएँ अब 'रेअर' होती हैं. आमतौर पर ऐसे कदम अत्यधिक गुस्से में या अत्यधिक डिप्रेशन के कारण उठाते हुए ही अब तक देखा, सुना या पढ़ा है. फिर किसी दुसरे की वजह से ख़ुद को खत्म कर देना ये कहाँ तक सही है ?  

मेरे दिमाग में बार बार यही सवाल आ रहा है कि आख़िर जिया ने ऐसा क्यों किया ? क्या 25 साल कि उम्र में उसे ये एहसास हो गया कि बस अब ज़िंदगी में कुछ रखा नही है... या सच में वो कुछ साबित करना चाहती थी... या फिर ये फैसला बेहद तनाव में लिया गया था. जो भी हो सच यही है कि मामले को उलझा छोड़, सबको सकते में डाल... जिया अब इस दुनिया में नही रही.


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