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Showing posts from February 24, 2013

पुराने दिनों को याद कर रही थी..... कुछ यादें

सुनो,
(गिन्नि, निधि, श्वेता, भोली, सोनल,  शिल्पी)

लो एक बार फिर अपना बचपन जी जाएँ

गलती कि सज़ा मिलने पर एक साथ सभी खड़े हो जाएँ

उत्तर नही आने पर एक दुसरे को नकल करवाये

इन्दुबाला जीजी कि कक्षा में सब सो जाएँ

लमहर सहरिया पर पाँव थिरकाये

विज्ञान मेला में ऊधम मचाये

मोहन भइया और बोन्नी संग खूब सिटी बजाये

लड़का हो या लड़की डिक्की से ये पूछ कर आयें

ट्रेन में खिड़की के पास बैठने के लिए

आपस में लड़ जाएँ

एक दूसरे से फ़ोन पर घंटों बतियाएँ

बीना बात एक दूसरे के घर जाएँ

और,  ढेर सारे पत्र मित्र बनाएँ

चलो, एक बार फिर अपना बचपन जी जाएँ


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मानसिकता

ज मेट्रो में दो महिलाओं कि बातों ने सोचने पर मजबूर कर दिया कि लोग कैसी कैसी मानसिकता लेकर जीते है. एक महिला दूसरी को समझाए जा रही थी कि मैडम आज के समय में महत्वपूर्ण सिर्फ़ माया है. अब देखिये लड़कियों का बलात्कार हो जाता है, उनकी ज़िंदगी बरबाद हो जाती है, उनके माँ - पिता को पैसे दे दिए जाते है और फिर वो चुप होजाते है. उनके पास उदाहरण भी पता नही कहाँ कहाँ से आ जा रहे थे.... यहाँ तक कि आजकल कि सारी लड़कियाँ जो अपने बलबूते अच्छी ज़िंदगी जी रही है उसे भी वो ग़लत नजर से ही देख रही थी उनका मानना था कि आज कल कि लड़कियाँ बमुश्किल दसवीं पास करती है और चार - पाँच हज़ार कि नौकरी करने लगती हैं लेकिन जितना खर्चीला जीवन जीती है कही से भी ये महसूस नही होता कि उनकी कमाई इतनी कम है, तो आख़िर उनके पास इतना रुपया आता कहाँ से है, इसी सब तरीके से आता है.

मैं सुन रही थी जब जवाब देने का सोचि तब तक वो मैडम उतर गयी... बड़ी कोफ्त हुई उनकी बातें सुनकर... क्या उनके विचार है. कम से कम अपनी सोच को लोगों कि सोच तो ना बनाइये... ऐसा आप सोचती है, लोग नही. कल को अगर आपकी बेटी के साथ ऐसा कुछ भी होता है तो शायद आपका रवै…