Monday, December 17, 2012

बुरा स्वप्न

आँखों की पुतली में हरकत 
एक आस 
शायद अभी खुलेंगी आँखें 
और हम पुनः जुट जाएंगे
इशारों को  समझने में 
लेकिन 
पलकें मूँद गयी 
स्थिर हो गयी पुतलियाँ 
धडकनें थम गयी 
चेहरे पर असीम शान्ति 
हथेलियों की गर्माहट घटने लगी 
क्षण भर में 
बर्फ हो गयी हथेलियाँ 
हर तरफ सिसकियाँ 
लेकिन मैं गुम थी 
विचारों के 
उथल पुथल में -
मृत्यु इतनी शीतल है 
फिर 
गर्म - खारे पानी का ये सैलाब क्यों 
जब मृत्यु इतनी शांत है 
फिर क्यों जूझना 
भावनाओं के तूफ़ान से 
मृत्यु तो सबसे बड़ा सच है 
फिर झूठी ज़िन्दगी से मोह क्यों ??    




© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!