Saturday, May 23, 2009

यादें भूल जाती हैं, बातें याद आती हैं...

बहुत दिनों से कुछ लिख नही पाई । कारण बहुत से है ... पर सबसे आसान जवाब है समय की कमी। व्यस्तता थोडी बढ़ गई थी । ऑफिस में काम से फुर्सत नही मिलता था ... घर पर थकावट कुछ लिखने नही देती थी। आज सारे काम निपट चुके हैं , कार्यक्रम का आउट चल रहा है। सोचा लगे हाथ क्यों ना कुछ लिख डालु। शनिवार की शाम यानी अभी ऑफिस के ज्यादातर लोग जा चुके है सिर्फ़ जिनका काम है या फ़िर लाइव वाले लोग रुके हुए हैं । मैं अपने काम से परेशान हूँ एपिसोड अभी तक आउट नही हो सका है । दो बार आउट लगा चुकी , कुछ ना कुछ प्रॉब्लम हो रहा है। इन्ही सब उलझनों में फंसी मैं... जाने कब अपनी सोच में उलझ गई पता ही नही चला।

छोटी ... मेरी सबसे अच्छी दोस्त ... जो कभी मेरे सबसे करीब थी । मेरी बहुत सी बातें जो सिर्फ़ वो जानती थी और उसकी बहुत सी बातें शायद सिर्फ़ मैं जानती थी। आज मुझसे कितनी दूर ... या शायद आज हमदोनो अजनबी बन चुके हैं। उसने ग्रीटिंग्स में लिखा था की जब मैं समय को पकड़ लूंगी तब हमदोनो साथ होंगे। आज न जाने कितने साल गुज़र चुके हैं ... हमदोनों की मुलाक़ात नहीं हुई। घर पर रहने के बावजूद ना वो मुझसे मिलने आई ना मुझे कुछ ख़ास इक्षा हुई उससे मिलने की। आज उसकी शादी हो चुकी है... अपने वैवाहिक जीवन में वो व्यस्त है और मैं अपनी नौकरी में उलझी हुई हूँ। बहुत सी खट्टी मीठी यादें हैं ... हमारी और उसकी जो मैं कभी नहीं भूल सकती। मैं जब भी परेशान होती थी कभी अपनों से गुस्सा होती थी तो उसी के पास जाकर अपना भडास निकालती थी।
यार छोटी आज मैं बिल्कुल अकेली हूँ। अब तो मैं डायरी भी नहीं लिखती... तेरी याद आती है । कभी कभी तो बहुत ज्यादा .... मुझे नहीं पता क्यों ...तू इतनी दूर हो गई... फ़िर भी क्यों पता नहीं क्यों ।

11 comments:

उन्मुक्त said...

कभी कभी आपके सबसे करीबी, सबसे प्रिय दूर चले जाते हैं और यह दुखदायी होता है।

Anil Kant said...

अपना करीबी दोस्त जब दूर हो जाये और नियमित संपर्क न हो तो दुःख होता है ...अकेलापन महसूस होता है ...कभी कभी दिल डूब सा जाता है सोचते सोचते

अनिल कान्त : said...

lekin jab dost ki shadi ho jati hai ya job lag jati hai to doori to na chahte hue ho hi jati hai ...yahi zindgi hai

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

जीवन में ऐसे अवसर सभी के साथ आते है जब बहुत ही निकटतम से दूर रहना एक मजबूरी हो जाती है . बढ़िया भावपूर्ण पोस्ट. बधाई.

Navnit Nirav said...

hamare paas to sifr 24 ghante hi hain. isi mein hamein bahut saare kaam karne hote hain . apne interest ko bhi banaye rakhna padta hai aur rishte bhi nibhane hote hain.
Navnit Nirav

Udan Tashtari said...

यह सब जीवन का हिस्सा है..निश्चित ही तकलीफदेह तो है ही!

मीत said...

yaden hi to hain jeene ka sahara...
meet

lumarshahabadi said...

ham bhi akele........

lumarshahabadi said...

mit na mila re ..........

ढिंढोरा said...

jaye d babi ,fer bhent ho ee

mitakshara said...

chal akela,chal akela ,chal akela
tera mela pichhe chuhuta rahi ...

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