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...जो छुट गया वह कहाँ मिले.



सरस्वती पूजा के साथ ही शुरू हो जाता है पावन बसंत। बचपन से ही मुझे बसंत का मौसम बेहद पसंद है । इस मौसम में न तो ज़्यादा ठण्ड होती है और न ही गर्मी । आम के पेड़ों पर मंजर आ जाता है ,
ज्यादातर फूलों के खिलने का मौसम भी यही होता है।

बसंत बह त्रिविध , सब कहे सुलभ पदारथ चारी। '

एक समय था जब हमारे आरा के घर के बागीचे में बड़े वाले नीबूं, जिसे उधर की भाषा में घाघर बोलते हैं, का पेड़ हुआ करता था । इस मौसम में ही उसमे फूल लगते हैं। जब हम अपने कमरे की खिड़कियाँ खोलते थे। उसकी खुशबू से सारा कमरा भर जाता था। वो ऐसी खुशबू थी जिसे नहीं भूल पाई हूँ मैं आज तक। ऐसा लगता था की किसी रूहानी दुनिया का सुख मिल गया हो । शायद यही कारन रहा हो... यही वो अनुभव रहा हो जिससे प्यार का पर्व भी इसी मौसम में आता है। प्यार भी तो वही अहसास है जो रूह से रूह तक जाता है।

बसंत के बाद ही फागुन का महिना होता है । गांवों में तो बसंत के बाद ही होली की शुरुआत हो जाती है। ' साहब सेवक एक संग, खेले सदा बसंत '।

जगह जगह फगुआ गाना शुरू कर देती है टोली। हालांकि मुझे ख़ास देहात के फगुआ का मजा तो कभी नहीं मिला लेकिन लोगों से सुनकर उसके आनंद को मैंने महसूस किया है। जैसे मौसम में मुझे बसंत प्रिये है वैसे ही त्यौहारओं में होली जाने क्यों मुझे बेहद पसंद है। होली की मस्ती ... होली का हंगामा दिल में एक हलचल मचा देता है। रंग लगवाने को लेकर पहले ना ...ना ...ना, फ़िर हाँ ...हाँ उफ़ बचपन की मस्ती की बात ही कुछ और थी । उसकी ही यादें है जो आज भी मुझे ये सबकुछ बेहद पसंद है। लेकिन हाँ वो निश्चिन्तता... वो अल्हरपन ... वो समय अब ना रहा ... वो हम ना रहे।

Comments

मुझे रंगो से एलर्जी है इसलिये होली नहीं भाती।
विनय said…
बहुत आकर्षक है लेखनी !
आशीष said…
holi aane me abhi vakhat hai...lekin apne to abhi se hi blog ko holimay kar diya hai...


ashish maharishi
Bandmru said…
pariwartan sansar ka niyam hai...... wo yaden hai... aur rahengi.... isi men khush hona hai..... waise aachchha likha hai aapne......holi haiiiiii.
Udan Tashtari said…
वो समय अब ना रहा ...
बहुत सुंदर ढंग से अपने बचपन के बारे में लिखा है....
pallavi trivedi said…
मुझे याद है हमारे स्कूल में बसंत पंचमी को सब पीले कपडे पहनकर आते थे और केसर वाला भात भी बनता था....अब तो सचमुच जमाना बीत गया!

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