...लेकिन शर्म उनको आती नहीं.




मुझे शिकायत है उनलोगों से जो बसों में आम तौर पर वरिष्ठ नागरिक की सीट पर कब्ज़ा जमा कर बैठ जाते हैं और बुजुर्ग खड़े होकर यात्रा करने पर मजबूर होते हैं। अगर कभी अपने वरिष्ठ होने की बात कहकर वे उन्हें उठाने की कोशिश करते हैं तो ये लोग बेशर्मों की तरह हंस कर अपनी नज़रें चुरा लेते हैं और बुजुर्ग खड़े रह जाते हैं। मुझे शिकायत है उन नौजवानों से भी जो बसों में, भीड़ में लड़कियों और महिलाओं को छूने के बहाने खोजते हैं।अगर कोई महिला या लड़की उन्हें इसके लिए रोकने का हिम्मत जुटाती है तो वे बडे ही बेशर्मी से उनसे लड़ बैठते हैं। मुझे शिकायत उनसे भी है जो धुम्रपान निषेध की वैधानिक चेतावनी के बावजूद सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पिते हैं और अपने साथ साथ औरों की भी बीमारी की वजह बनते हैं।
शिकायतें तो बहुत हैं....लेकिन ये कुछ ऐसी समस्याएं है जिनसे हम लडकियां रोज ही दो चार होते हैं । पर सवाल ये उठता है की आखिर किस किस का और कहाँ कहाँ विरोध करें? कभी मुंबई, कभी डेल्ही, कभी मंगलूर तो कभी कानपुर में नैतिकता के बहाने समाज के ठेकेदार जब अपनी ठेकेदारी पर उतरते हैं तब क्या उन्हें ये सब नज़र नहीं आता या, वे भी उनमें से ही एक हैं जो लड़कियों को छूने के बहाने खोजते हैं ?
© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

Comments

Bandmru said…
katu satya...........

Popular posts from this blog

मनुष्य एक सामाजिक नहीं सामूहिक प्राणी है!

महिला दिवस और एक सशक्त महिला

‘आई ऍम फैन युसु’