Saturday, November 29, 2008

मुंबई मेरी जान





चमचमाती रोशनी से नहाई
मुंबई की रात
और नगर की पहचान
भव्य ताज
कई ऐतिहासिक घटनाओं की गवाह

लेकिन,
बुधवार की काली रात
देखते ही देखते
छा गया तबाही का मंज़र
मुठी भर दहशतगर्दों के हाथों में थी
सैकडों लोगों की जान

ग्रेनेड के धमाकों
और गोलियों की आवाजों ने
ोडी रात की चुप्पी
देखते ही देखते आग और धुएँ में नहाई थी
मुंबई की भव्यता
देश की आर्थिक राजधानी
डूब गई अंधेरे में.

Tuesday, November 25, 2008

डायरी के पन्नो से

चंदा

बादलों के पीछे से छिपकर
आता है चंदा,
किसी सुन्दरी के माथे पर लगी
गोल बिंदिया सा चमचमाता है चंदा।
कभी यहाँ और कभी वहां
जगह बदलता जाता है चंदा।
कभी कभी इस विशाल आसमान में
घर भी भटक जाता है चन्दा ।
कभी मंदिरों के पीछे, तो कभी दरख्तों के ऊपर
कभी बादलों के पीछे, तो कभी अटारी पर
पहुँच जाता है चंदा।
(ये कविता जब मैं नौवी कक्षा में थी तब लिखी थी। )

आह्वान

हे देश के युवा
भविष्य निर्माता
है अगर ताक़त तुममे
है अगर तुम्हारी शिक्षा में बल
तो बढ़ो आगे और
उखाड़ फेंको
इस अशिक्षा रूपी ठूंठ को
जिससे मिलता नहीं
किसी व्यक्ति को
सहारा
और लगा दो वहां
शिक्षा के हरे भरे पेड़
इन्हे सिचने के लिए
तुम्हारा प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम
के लिए दृढ़ संकल्प होना ही
काफ़ी है।
हे वीरों, देश के युवाओं
तो चलो हम सब मिलकर
देश से तिमिर का अंत कर
उजाला फैलाएं
और देश को शिक्षित बनाएं।
( ये कविता जब मै दसवीं बोर्ड पास करने के बाद लिखी । )