Sunday, September 21, 2008

एड्स: जारी है संघर्ष


पिछले दिनों अपने कार्यक्रम के सिलसिले में मैंने एड्स रोगियों से मुलाक़ात की कोशिश की । ये काम इतना आसान भी नहीं था। काफ़ी नेट सर्फिंग के बाद कुछ एनजीओ का पता मिला जो इनलोगों के लिए काम करते हैं। पता लेकर आनन फानन में मैं उनसे मुलाक़ात तय कर मिलने के लिए चली गई। कुछ इंतज़ार के बाद मेरी मुलाक़ात उस आरगेनाइजेशन को चलाने वाले से हो गई। छोटे से परिचय के बाद काम की बात शुरू हुई। मैंने अपने कार्यक्रम के बारे में बताया , ये भी कहा की मुझे एड्स रोगी से मिलना है, उनके परिवारवालों से मुलाक़ात करनी है। इधर उधर की बात के बाद वो सज्जन समझाने लगे की क्या कोई एड्स रोगी कैमरा के सामने आएगा...नहीं। जब कोई भी व्यक्ति एच आई वी पोसिटिवे होता है तो उसके सामने सबसे पहले उसका परिवार आता है... फ़िर ज़िन्दगी जीने की समस्या आती है, फ़िर सवाल उठता है की आख़िर ज़िन्दगी जीने के लिए अहम् चीज़ ....पैसा ,कहाँ से आएगा.....ये सारी समस्याओं को बताने के बाद वे मुझसे पूछे की क्या हमारा चैनल उन्हें पैसे भी देगा? मैंने पैसे देने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर की और कहा की हम उनकी समस्याओं को लोगों के सामने लायेंगे, पर इसके लिए उन्हें हमारा साथ देना होगा। इसके बाद वे सज्जन बहुत तरह की बातें करते रहे, फ़िर मुझसे पूछा की अगर मान लो हम साथ में काम कर रहे हैं , हम दोनों के बिच अच्छी दोस्ती भी हो, और तीन चार साल के बाद अचानक तुम्हे पता चले की में एच आई वी पोसिटिव हूँ तुम्हारी क्या प्रतिक्रिया होगी। मुझे पहले तो समझ नहीं आया की क्या जवाब दूँ, सिर्फ़ इतना ही कह सकी की मुझे अफ़सोस होगा।
इसके बाद उन्होंने कहा की वे मेरी मदद करेंगे पर इसके लिए मुझे एक कंसेंट फॉर्म साइन करना पड़ेगा। में ओके कर दी। उसके बाद तय हुआ की जहांगीरपुरी में मेरी मुलाक़ात एच आई वी पोसिटिव महिला से होगी। तय दिन हम निकल पड़े , और पहुँच गए जहांगीरपुरी। उस महिला से मैंने पूछा की आखिर कैसे वे पोसिटिव हो गयीं और उन्हें इसका पता कैसे चला? वे बताई की उन्हें ये बिमारी उनके पति से मिली है और इस बीमारी की ख़बर तब हुई जब उनका पति अक्सर बीमार रहने लगा। जब डॉक्टर ने उसके सारे चेक उप करवाए तब पता चला की उसे ये बीमारी है फ़िर महिला की भी जांच की गई तो उसमे भी ये वाइरस था और उसकी बेटी जो उस वक्त चार या पाँच महीने की थी उसे भी ये बीमारी थी। उसके बाद उस औरत का पति, ये सोचने लगा की उसकी पत्नी के चाल चलन सही नही थे, इसलिए उसे ये बीमारी हुई । इसके लिए अभी भी पति , पत्नी को दोषी मानता है, साथ ही उसे खूब मारता पिटता है ।हलाँकि इस बारे में उनलोगों ने अपने परिवार में किसी को भी नहीं बताया है। ये सिर्फ़ पति -पत्नी को पता है। एनजीओ ने भी उनलोगों को अपनी बिमारी के बारे में किसी से भी कहने से मना कर रखा है। वे महिला बता रही थी की अगर किसी को पता चल जाए की सामने वाला ऐड्स का रोगी है तो उसके साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया जाता है। यहाँ तक की डॉक्टर और नर्स भी उनकों छूने से डरते हैं। उनके लिए काम करने वाले जो एनजीओ हैं उसके कार्यकर्ता भी उस बोत्तल से पानी पीना पसंद नहीं करते जिससे ऐड्स रोगियों ने पानी पिया हो।