Friday, July 25, 2008

(१)







पलकों से गिरे

आँसू, बन गए मोती

बेशकीमती रत्न ।







6 comments:

बाल किशन said...

अति सुंदर!
पर हर इंसान के साथ एसा नहीं होता और किसी किसी के साथ तो कभी नहीं होता.

मीत said...

jo in ratno ki keemat ko janta hai wo hota hai.. dariya dil
good priya

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह जी वाह कम शब्‍दो में ही आपने जहान लूट लिया बहुत अच्‍छा लिखते रहो

रंजना [रंजू भाटिया] said...

bahut sundar

hum tum said...

bahut sundar.ye to japani kavita ki shaili hai .bahut khubsurat rachna hai.

Bandmru said...

haiku shaili jaisi lag rahi hai.
lajwab. i like it.

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...