Saturday, May 10, 2008

समय

सुनने की कोशिश करती हूँ
आने वाले समय की आहट
ताकि तैयार कर लूँ ख़ुद को
हर परिस्थिति के लिए।
लेकिन
समय आता है दबे पाँव और
पल भर में तबाह कर देता है।
जन्म,मृत्यु,सुख, दुःख,
सब समय हीं दिखलाता है ,
वह है मदारी और हमें
बन्दर की तरह नचाता है ।

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...