Monday, April 14, 2008

परिवर्तन

धीरे धीरे चलते चलते


दूर कहीं हम आ पहुंचे है


चाहे भी तो ना रूक पाए


वक्त की धार से जूझ रहे हैं ।

1 comment:

mahendra mishra said...

बहुत सुंदर

अनंत चतुर्दशी-संस्मरण

का मथS तार... क्षीर समुद्र...का खोजS तार...अनंत भगवान... मिललें... ना। यूँ तो हमारे घर में पूजा पाठ ज़्यादा नहीं हुआ करता था। 'बाबा-अ...