अरमां

ऊंचे पर्वतो से बादलों को

टकराते देखा

सागर की लहरों को

बार बार तट पर आते देखा

दिल मे एक अरमान जागा

काश। मैं बादल होती और तुम

पर्वत

या फिर मैं लहरें होती और तुम

किनारा।

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