Thursday, October 4, 2007

यादें

मेरा घर

मेरे अपने

और वो मीठी बातें

चाय की चुस्कियों के साथ

जब कटती थी दिन और
रातें

यादें और बस यादें ।

मेरा कमरा

मेरा बिस्तर

और वो दीवारें

जिसके इस पार और उस पार

सजती थी ढेरों तस्वीरें बार बार

मेरी बगिया इस बार

कह रही थी बार बार

करो मेरा श्रृंगार

फिर से करो मेरा श्रृंगार ।

माँ की झिड़की

पापा का ग़ुस्सा

क्यो याद आता है बार बार ।

3 comments:

rajnish said...

why u forgot ur specs, antena.
whenever u remember those things i sure u always remember me.
cheers
keepit up
bye

आईना said...

Rajnish mujhe pata hai tum hamesha meri kami ko hi to dikhaoge but thanks yaar for your funny comment which give me a smile on my face.

Wanted said...

Hi Blogger !
Accept my heartiest greets for your Blog.
-Gunjan

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